हिंदी फिल्म - विदेशी कथावस्तु
Wednesday, September 27, 2006

फिल्म मदर इंडिया (1957) तो जरूर देखी होगी आपने| अपने जमाने की मशहूर फिल्म थी| कहानी ली गई थी Maxim Gorky के विख्यात उपन्यास Mother से| भारतीय रूपांतरण बड़ी दक्षता के साथ किया गया था| ये फिल्म मेहबूब ख़ान की अपनी ही फिल्म औरत (1940) के रीमेक थी|
और भी कई फिल्में बनी हैं विदेशी कहानी एवं उपन्यास के आधार पर| पर उनमें से कुछ फिल्में इतनी अच्छी बनी हैं कि दर्शक को फिल्म कहीं कुछ भी विदेशी जैसा नहीं लगता| हेमंत कुमार द्वारा बनाई पुरानी फिल्म बीस साल बाद (1962) तो अवश्य देखी होगी आपने| लगा कभी आपको उसमें कु विदेशी जैसा? आपको पता ही होगा कि वो फिल्म Sir Arthur Conan Doyle की कहानी The Hound Of The Baskervilles पर आधारित थी| निर्देशक बिरेन नाग की तारीफ करनी पड़ेगी विदेशी कथा को इतने सुंदर भारतीय रूप में प्रस्तुत करने के लिये| और हाँ अपने समय की सबसे अधिक डरावनी फिल्म थी वो|
बिमल राय ने प्रसिद्ध नाटककार William Shakespeare के नाटक Comedy of Errors पर आधारित हास्य फिल्म दो दूनी चार (1968) बनाई थी| किशोर कुमार और असित सेन दोनों के ही डबल रोल थे उस फिल्म में| सन् 1982 में गुलज़ार ने भी फिल्म अंगूर बनाई थी, इस बार संजीव कुमार और देवेन वर्मा डबल रोल में थे| दोनों ही बार कथा का भारतीयकरण इतने सुंदर ढंग से किया गया था कि कहीं भी किसी प्रकार का विदेशीपन नहीं झलकता|
मेरे अपने विचार से तो सबसे अच्छा भारतीयकरण हुआ है Eric Segal के उपन्यास Man, Woman, and Child का शेखर कपूर के फिल्म मासूम (1983) में| भारतीय रूप देने के लिये शेखर कपूर ने उपन्यास के क्लाइमेक्स को ही बदल दिया और बालक को अपना कर परिवार का सदस्य बना दिया जबकि असली उपन्यास में बालक को अपनाया ही नहीं गया है|श्री अनूप भार्गव की टिप्पणी से साभार -
"विदेशी कथावस्तु पर बनी फ़िल्मों की चर्चा में 'परिचय' का नाम कैसे भूला जा सकता है ?
गुलज़ार साहब नें Sound of Music का बहुत ही सुन्दर रूपान्तर किया था - भारतीय परिवेश को ले कर"
पुनश्चः
उन्मुक्त जी के टिप्पणी के अनुसार फिल्में "दो कलियें" और "अकेले हम अकेले तुम" भी विदेशी कथावस्तु पर आधारित हैं|
posted by जी.के. अवधिया @ 10:09 PM,
3 Comments:
- At 2:07 PM, अनूप भार्गव ने कहा...
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अच्छा लेख है ।
विदेशी कथावस्तु पर बनी फ़िल्मों की चर्चा में 'परिचय' का नाम कैसे भूला जा सकता है ?
गुलज़ार साहब नें Sound of Music का बहुत ही सुन्दर रूपान्तर किया था - भारतीय परिवेश को ले कर - At 9:14 AM, ने कहा...
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कंप्यूटर प्रोग्राम
- At 9:15 AM, ने कहा...
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इसमें दो कलियें और अकेले हम अकेले तुम भी जोड़ लीजये।







