शैलेन्द्र - संवेदनशील गीतकार
Monday, September 25, 2006
"के मर के भी किसी को याद आयेंगे
किसी के आँसुओं में मुस्कुरायेंगे
कहेगा फूल हर कली से बार बार
जीना इसी का नाम है....."
(फिल्म अनाड़ी)
सरल और सटीक शब्दों में भावनाओं और संवेदनाओं को अभिव्यक्त कर देना शैलेन्द्र जी की महान विशेषता थी| किसी के आँसुओँ में मुस्कुराने जैसा विचार केवल शैलेन्द्र जैसे गीतकार के संवेदनशील हृदय में आ सकता है| उनकी संवेदना का एक और उदाहरण देखिये -
"कल तेरे सपने पराये भी होंगे लेकिन झलक मेरे आँखों में होगी
फूलों की डोली में होगी तू रुखसत, लेकिन महक मेरे साँसों में होगी....."
(फिल्म ब्रम्हचारी)
शायद उनके लिखे ये शब्द आपके भी हृदय को छू लेती होगी -
"तेरे मेरे दिल के बीच अब तो सदियों के फासले हैं
यकीन होगा किसे के हम तुम इक राह संग चले हैं....."
(फिल्म गाइड)
शायद कभी प्यार की राह में कभी ऐसे गिरे रहे होंगे वे कि फिर कभी संभल नहीं पाये| इसीलिये वे लिखते हैं
"सहज है सीधी राह पे चलना
देख के उलझन, बच के निकलना
कोई ये चाहे माने न माने
बहुत है मुश्किल गिर के संभलना....."
(फिल्म जिस देश में गंगा बहती है)
कितने सुंदर ढंग से दर्शा देते हैं वे कि दिल बिक भी सकता है और धड़क भी सकता है -
"उस देश में, तेरे परदेश में सोने चांदी के बदले में बिकते हैं दिल
इस गाँव में, दर्द के छाँव में प्यार के नाम पर ही धड़कते हैँ दिल....."
(फिल्म श्री 420)
फिल्मों में गीत लिखने के पहले देश के आजादी की लड़ाई में योगदान देने का उनका एक अलग ही तरीका रहा है| वे उस समय देशभक्ति से सराबोर वीररस की कविताएँ लिखा करते थे और उन्हें जोशोखरोश के साथ सुनाकर सुनने वालों को देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत कर दिया करते थे, परिणामस्वरूप देश के आजादी के वीरों का बहुत अधिक उत्साहवर्धन होता था| उनकी रचना 'जलता है पंजाब......' ने उन दिनों बहुत प्रसिद्धि पाई| फिल्मों मेँ आने के बाद भी उनका ये ज़ज़्बा बना ही रहा इसीलिये वे गरीब भारतीय की अभिव्यक्ति इन शब्दों में करते हैँ -
"मेरा जूता है जापानी, ये पतलून इंग्लिस्तानी
सर पे लाल टोपी रूसी, फिर भी दिल है हिंदुस्तानी....."
(फिल्म श्री 420)
एक हिंदुस्तानी स्त्री की भावनाओं का कितना सुंदर प्रदर्शन करते हैं वे अपने इस गीत मेँ -
"तन सौंप दिया, मन सौंप दिया, कुछ और तो मेरे पास नहीँ
जो तुम से है मेरे हमदम, भगवान से भी वो आस नहीँ....."
(फिल्म संगम)
ग्लैमर की दुनिया में रहकर भी दौलत इकट्ठा न कर पाये कभी| सीधे सच्चे इंसान थे वे, होशियारी कभी सीख ही न सके| उनके ही शब्दों में -
"सब कुछ सीखा हमने, ना सीखी होशियारी
सच है दुनिया वालों, के हम हैं अनाड़ी....."
(फिल्म अनाड़ी)
काल के गाल में एक दिन जाना तो सभी को होता है पर शैलेन्द्र जैसे गीतकार के चले जाने से भारतीय सिनेमा में आया खालीपन कभी भी न भर पायेगा| ये जानते हुये भी कि उनके लिखे इन शब्दों का सच होना असंभव है, चलिये एक बार दुहरा लेते हैं उनके उन असंभव शब्दों को -
"ओ जाने वाले हो सके तो लौट के आना....."
(फिल्म बंदिनी)
posted by जुड़िये गँठजोड़ मित्र समुदाय से! (gathjod.com) @ 9:17 AM,
3 Comments:
- At 11:43 AM, SHUAIB ने कहा...
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ठीक है
- At 2:10 PM, अनूप भार्गव ने कहा...
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शैलेन्द्र जी के कुछ और यादगार गीत :
- सजन रे झूँठ मत बोलो खुदा के पास जाना है
- चलत मुसाफ़िर मोह लिया रे ...
- जीना यहाँ , मरना यहाँ , इस के सिवा जाना कहाँ - At 1:57 AM, Media And Literature ने कहा...
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shailendra ji ke baare me aapka research saraahaniya hai.........shailendfra ji ne bhojpuri filmo me jo geet likhe hai unke baare me kuchh rearch prapt ho sakta hai bandhu????







